भीड़ तो बहुत है मेरे आसपास
पर ना जाने क्यों एक तन्हाई सी संग है
इस ढेर में से चुनना एक अनमोल मोती
मानो जैसे अपनों से लड़नी एक जंग है
किसी महफिल में तो लगता सब अपने है
बेजान सा लगता जीवन, जान की ये सपने है
अक्सर हर घड़ी साथ रहने करते है दावा
किसी मोड़ पर , होता एहसास की ये है दिखावा
चंद लम्हों में जिए थे वो , जीवन के पल चार
एक छोटी सी , बात से न जाने लगते सब बेकार
दुनिया में लोगो को संभालने और जोड़ने का झमेला है
याद रख ए इंसान, तू यहां हर पल अकेला है
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