Wednesday, May 10, 2023

अकेला

भीड़ तो बहुत है मेरे आसपास
पर ना जाने क्यों एक तन्हाई सी संग है
इस ढेर में से चुनना एक अनमोल मोती 
मानो जैसे अपनों से लड़नी एक जंग है 

किसी महफिल में तो लगता सब अपने है 
बेजान सा लगता जीवन, जान की ये सपने है 

अक्सर हर घड़ी साथ रहने करते है दावा
किसी मोड़ पर , होता एहसास की ये है दिखावा 

चंद लम्हों में जिए थे वो , जीवन के पल चार 
एक छोटी सी , बात से न जाने लगते सब बेकार 

दुनिया में लोगो को संभालने और जोड़ने का झमेला है 
याद रख ए इंसान, तू यहां हर पल अकेला है